अल नीनो का बढ़ता खतरा 12 राज्यों के 315 जिलों में कम बारिश की आशंका

अल नीनो के असर से 315 जिलों में कम बारिश की आशंका, किसानों के लिए सरकार ने विशेष निगरानी व्यवस्था बनाई।


अल नीनो का बढ़ता खतरा! 12 राज्यों के 315 जिलों में कम बारिश की आशंका, किसानों के लिए सरकार अलर्ट

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में मानसून की धीमी रफ्तार के बीच अल नीनो (El Niño) का खतरा किसानों की चिंता बढ़ाने लगा है। मौसम में संभावित बदलाव और कम बारिश की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने हालात पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को समीक्षा बैठक कर राज्यों को जरूरी तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए।

कृषि मंत्रालय के अनुसार, अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए विशेष मॉनिटरिंग सेल और क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप को सक्रिय किया गया है, जो देशभर की मौसम और फसल संबंधी परिस्थितियों पर लगातार नजर रखेंगे।

315 जिलों में कम बारिश का अनुमान

समीक्षा बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार देश के लगभग 315 जिलों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई गई है। इनमें से 111 जिलों को अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन जिलों में सिंचाई सुविधाएं सीमित होने के कारण कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे क्षेत्रों में किसानों को मौसम की स्थिति के अनुसार खेती की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

इन 12 राज्यों पर सबसे ज्यादा असर की आशंका

कृषि मंत्रालय के अनुसार मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना सहित कुल 12 राज्यों में अल नीनो का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है।

मंत्रालय ने बताया कि कई क्षेत्रों में अब तक सामान्य के मुकाबले वर्षा में लगभग 43 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो खरीफ सीजन की फसलों पर इसका असर पड़ सकता है।

किसानों के लिए तैयार किया गया विशेष एक्शन प्लान

सरकार ने कम बारिश वाले जिलों के लिए अलग से आपातकालीन कार्ययोजना तैयार करने का फैसला लिया है। जिला कृषि संकट योजनाओं को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपडेट किया जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर किसानों को तुरंत सहायता मिल सके।

इसके अलावा कृषि विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों तक समय पर मौसम आधारित सलाह और आवश्यक जानकारी पहुंचाएं।

जल संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस

बैठक में जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। केंद्र सरकार ने राज्यों को तालाब, खेत-तालाब, चेक डैम और अन्य जल संरचनाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण की बेहतर व्यवस्था कम बारिश की स्थिति में किसानों को काफी राहत दे सकती है।

कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह

कृषि मंत्रालय ने किसानों को ऐसी फसलों की खेती करने की सलाह दी है जिन्हें कम पानी की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि किसी एक फसल पर निर्भरता कम हो और नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

बुवाई में जल्दबाजी न करें किसान

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील की है कि पर्याप्त वर्षा होने तक खरीफ फसलों की बुवाई में जल्दबाजी न करें। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और डिजिटल माध्यमों से किसानों तक लगातार मौसम संबंधी सलाह पहुंचाई जाएगी।

मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में अभी बड़े पैमाने पर खरीफ बुवाई शुरू नहीं हुई है। ऐसे में अगले कुछ सप्ताह किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

खाद्य सुरक्षा को लेकर सरकार आश्वस्त

सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसी भी स्थिति में खाद्य सुरक्षा पर असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। साथ ही राज्यों के साथ समन्वय बनाकर किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

निष्कर्ष

अल नीनो के संभावित प्रभाव ने इस बार खरीफ सीजन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कम बारिश की आशंका वाले 315 जिलों पर सरकार की विशेष नजर है। ऐसे में किसानों के लिए मौसम की जानकारी पर ध्यान देना, जल संरक्षण उपाय अपनाना और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार बुवाई करना बेहद जरूरी होगा।

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