महाराष्ट्र में कमजोर पड़ा मानसून सुनेत्रा पवार ने किसानों से की जल्दबाजी में बुवाई न करने की अपील

सुनेत्रा पवार ने किसानों को पर्याप्त बारिश तक बुवाई टालने की सलाह दी, महाराष्ट्र में मानसून कमजोर।

महाराष्ट्र में कमजोर मानसून के बीच राज्य की उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने किसानों से जल्दबाजी में बुवाई न करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में अभी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, इसलिए किसान स्थायी और अच्छी वर्षा का इंतजार करें। जल्दबाजी में की गई बुवाई किसानों के लिए नुकसान का कारण बन सकती है।

मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान सुनेत्रा पवार ने कहा कि फिलहाल राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में अच्छी बारिश की संभावना नहीं दिख रही है। ऐसे में किसानों को धैर्य रखना चाहिए और खेतों में बुवाई शुरू करने से पहले पर्याप्त नमी बनने का इंतजार करना चाहिए।

महाराष्ट्र में सामान्य से काफी कम बारिश

राज्य सरकार के सामने पेश की गई हालिया कृषि समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार जून महीने के पहले पखवाड़े में महाराष्ट्र में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 15 जून के बीच राज्य में केवल 27.4 मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि सामान्य बारिश 103.8 मिलीमीटर मानी जाती है।

इस तरह महाराष्ट्र को इस अवधि में सामान्य वर्षा का केवल 26 प्रतिशत ही प्राप्त हुआ है। कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की बुवाई भी प्रभावित हुई है और अधिकांश किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

खरीफ सीजन पर पड़ा असर

मानसून की धीमी रफ्तार का सबसे अधिक असर खरीफ सीजन पर दिखाई दे रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी तक राज्य में खरीफ फसलों की बुवाई बहुत कम क्षेत्र में हो पाई है।

किसान अच्छी और लगातार बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि फसलों की बुवाई के बाद बीजों का अंकुरण सही तरीके से हो सके।

जल्द बुवाई करना क्यों हो सकता है नुकसानदायक?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान शुरुआती या छिटपुट बारिश के बाद बुवाई कर देते हैं और उसके बाद बारिश रुक जाती है, तो बीजों का अंकुरण प्रभावित हो सकता है।

ऐसी स्थिति में किसानों को दोबारा बीज खरीदने, खेत तैयार करने और मजदूरी पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। इससे खेती की लागत बढ़ जाती है और आर्थिक नुकसान भी होता है।

इन क्षेत्रों के किसानों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत

महाराष्ट्र के कई इलाके वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • विदर्भ
  • मराठवाड़ा
  • खानदेश
  • पश्चिमी महाराष्ट्र के कुछ हिस्से

इन क्षेत्रों में सोयाबीन, कपास, मक्का, धान और दलहन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इन फसलों की सफलता काफी हद तक समय पर और पर्याप्त मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है।

PM-Kisan योजना की राशि का भी किया जिक्र

सुनेत्रा पवार ने किसानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना की राशि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसानों के खातों में योजना की किस्त उपलब्ध कराई जा चुकी है।

गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त जारी की गई है। इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को सालाना 6,000 रुपये की सहायता तीन किस्तों में दी जाती है।

हालांकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक सहायता किसानों को राहत जरूर देती है, लेकिन समय पर बारिश का विकल्प नहीं हो सकती।

23 जून के बाद बेहतर हो सकते हैं हालात

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 23 जून के आसपास महाराष्ट्र के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं।

यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश होती है तो किसानों को बुवाई शुरू करने का अवसर मिल सकता है। फिलहाल कृषि विभाग किसानों को पर्याप्त मिट्टी की नमी बनने तक इंतजार करने की सलाह दे रहा है।

किसानों के सामने बड़ी चुनौती

मौजूदा स्थिति में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही समय पर बुवाई करने की है। कुछ दिनों की देरी से बुवाई करना नुकसानदायक नहीं माना जाता, लेकिन बिना पर्याप्त बारिश के जल्दबाजी में बुवाई करने से पूरी फसल प्रभावित हो सकती है।

इसलिए कृषि विशेषज्ञ और राज्य सरकार दोनों किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे मौसम की स्थिति पर नजर रखें और पर्याप्त वर्षा होने के बाद ही खेतों में बुवाई शुरू करें।

निष्कर्ष

महाराष्ट्र में कमजोर मानसून और कम वर्षा के चलते खरीफ सीजन की शुरुआत प्रभावित हुई है। ऐसे में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने किसानों से जल्दबाजी में बुवाई न करने और पर्याप्त बारिश का इंतजार करने की अपील की है। आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति पर किसानों की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यही खरीफ फसलों की सफलता तय करेगा।

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